इस चमत्कारी बिजनेस में उन्नति करके बिजनेस को बढ़ाने के यंत्र-मंत्र उपाय को किसी भी शुभ मुहूर्त, तिथि, योग, या हिंदु त्योहार के दिन पर या शुक्रवार के दिन पर कीया जा सकता है। इस महालक्ष्मी माता को प्रसन्न करने के यंत्र उपाय को करने के लिए दिवाली की रात सबसे शुभ मुहूर्त है।
महालक्ष्मी यंत्र बनाने की विधि इस प्रकार से है: साधक को सफेद कागज पर केसर की स्याही और अनार की कलम से आगे चित्र में दिखाए हुए महालक्ष्मी यंत्र को लिखना है। अंकों को किसी भी क्रम में, किसी भी भाषा में लिखा जा सकता है।
यंत्र बनाने के बाद उसकी पूजा करनी है और आगे बताए हुए महालक्ष्मी देवी के मूल मंत्र का ११ माला यानी की ११८८ बार जाप करना है। आसन, माला और दिशा का बंधन नहीं है, लेकिन मंत्र जाप करते समय यंत्र के सामने घी का अखंड दिया जलता रहना चाहिए।
|| श्री महालक्ष्म्यै नमः ||
|| Shri Mahalakshmyai Namah ||
इसके बाद महालक्ष्मी यंत्र को दुकान या ऑफिस में पैसे रखने की जगह, गल्ले या तिजोरी के ऊपर की दीवार पर फ्रेम या लैमनेट करके टंगाना है। महालक्ष्मी यंत्र को हमेशा साफ रखना चाहिए और हर दिन उसके सामने धूप या अगरबत्ती घुमानी चाहिए।
|| श्री महालक्ष्म्यै नमः ||
|| Shri Mahalakshmyai Namah ||
इसके बाद महालक्ष्मी यंत्र को दुकान या ऑफिस में पैसे रखने की जगह, गल्ले या तिजोरी के ऊपर की दीवार पर फ्रेम या लैमनेट करके टंगाना है। महालक्ष्मी यंत्र को हमेशा साफ रखना चाहिए और हर दिन उसके सामने धूप या अगरबत्ती घुमानी चाहिए।

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